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Sharing one of my all time favourite Ghazals. ⁣⁣
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ⁣⁣
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ⁣⁣
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पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो⁣⁣
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ⁣⁣
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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम⁣⁣
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ⁣⁣
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Penned by #ahmedfaraz ⁣⁣
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Love the rendition by #ChitraSingh and #MehdiHassan ❤️⁣⁣