अमृता प्रीतम के अल्फ़ाज़ पढ़कर वक्त
थमसा जाता है. एक अजीब सा रूहानी एहसास होता है. उनकी रचनाओं के तारीफ़ में लफ़्ज़ कम पड़ जाते है. जब भी मेने अमृता प्रीतम की किताबें पढ़ी, मन करा ठहर जाऊँ, उन किरदारों के साथ ज़िन्दगी व्यतीत करने की इच्छा हुई.

आज जब दस्तावेज़ पढ़कर खत्म की तो एक नयी दास्तान शुरू होगयी मेरे मन के भीतर. इमरोज़ और अमृता का प्यार कितना सच्चा और रूहानी था. और उन्होंने इस किताब के ज़रिए अपने प्यार की ख़ुशबू हम पाठको तक पोचाने का नेक काम किया है.

जहाँ one-night-stand एक fad बन चूका है वहां इमरोज़ जैसा सच्चा दोस्त आशिक और हमसफ़र  मिलना मुश्किल है।लेकिन, ज़्यादा कुछ न कहते हुए, ये आशा करती हु के लोग इस किताब को पढ़े, समझे, मेहसूस करे और उसे अपने रूह में उतरने दे, धीरे-धीरे

इश्क़ और आशिकी के माईने बदल जायेंगे. कोशिश करें read करने की.

To buy the book, pls click- https://amzn.to/3ilqeve

***Copyright in content and pictures belongs to Siddhi Palande, the owner of this blog, and cannot be republished or repurposed without permission from the author. Infringement of any kind will invite strict legal action.***