आप लोग सोच रहे होंगे कि सिद्धि भी कितनी अजीब है कई बारी तो हिंदी किताबों का अंग्रेजी में रिव्यु लिखती है लेकिन आज हिंदी में रिव्यु लिख रही है। तो उसके जवाब में सिर्फ यही कहूंगी की कुछ किताबें ऐसी होती है जो रूह छू जाती है और इब्नबतूती वैसी ही किताब है। दिव्य प्रकाश दुबे जी की लिखी यह किताब मैंने storytel पर सुन्नी।
यह किताब कुल 4 घंटे की है और यह किताब मैंने दिसंबर २०२१ में शुरू की थी लेकिन यह किताब २०२२ साल की पहली किताब रही।

इस किताब की कहानी काफी सरल है। शालू अवस्थी एक single mother है, राघव अवस्थी उनका बेटा है, जो कि आगे की पढ़ाई करने अमेरिका जा रहा है।  लेकिन उसे अपनी मां को अकेला छोड़ना मंजूर नहीं है। उसी दौरान उसे अपनी मां के भूतकाल के बारे में पता चलता है। वैसे तो काफी strong दिखने वाली शालू अवस्थी कभी romantic भी हुआ करती थी यह समझ के उसे आश्चर्य भी होता है और एक सुखद धक्का पहुंचता है। अब राघव आलोक कुमार को ढूंढने को अपना मशीन बना लेता है।

हालांकि यह story काफी सरल दिखाई देती है लेकिन यह पूरी जिंदगी का अनुभव है जो लेखक ने इस किताब द्वारा व्यक्त किया है। शालू अवस्थी की यह कहानी मुझे मेरी कहानी लगी। The characters are so real and they stay with you.  शालू अवस्थी एक headstrong महिला है। और उनके अनुभव reality दर्शाते है। Government offices में होनेवाला sexism और harassment के साथ ही समाज एक single mother को किस हीन नजरिए से देखता है वो इस कहानी में लेखक ने दिखाया है।

इस किताब में एक अनकही कहानी छुपी है और कई सारे एहसास भी। दुबे जी की कहानियां नजाने कैसे हमेशा मेरी आंखें नम कर जाती है। और १० अक्टूबर का जिक्र। अगर आप मुझे जानते है तो आप जानते ही होंगे की १० अक्टूबर मेरे जीवन में केवल मेरा जन्मदिन नही है, इस तारीख ने मेरे जीवन को असामन्या रूप से बदला है। इस तारीख की टीस ताउम्र मुझे महसूस होगी। और जब उस तारीख को दुबे जी कुछ अलग मोड़ पर लाके छोड़ देते है तब एक अकथनीय एहसास होता है। हमेशा।

इस कहानी को सुनते हुए nostalgic feel हुआ। एक पुराने दोस्त की याद आई जिसे वक्त के कोहरे में कही खो दिया था। लेकिन बहोत खोजने पर जब १० साल बाद उससे video call पर मुलाकात हुई तो लगा जैसे दुआ कुबूल हुई। सुकून की परिभाषा समझ आई। और उस दौरान में बसी सारी उथलपुथल को, सारी भावनाओं को दुबे जी ने बहुत खूबी से canvas पर उतारा है। साथ ही old school romance, वो 90s wala romance, वो love letters वाला romance। जब दुबे जी की किताबें पढ़ती हूं/ सुनती हूं तो लगता है जैसे ये प्रेम पत्रों वाला romance कभी out of fashion नही होगा।

Overall- This is a story of a beautiful mother-son relationship. This is a story of an unsung love story. This is a story of a headstrong woman. This is a story of the demons of caste system that are still lurking in the corridors of our society. This is our story. Give it a read or listen to it on Storytel.

Ps- I don’t write reviews in Hinglish so if there are grammatical errors then pls blame it on Google TTS.

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